महान गणितज्ञ की उपेक्षा पर कुमार विश्वास का सवाल, बिहार इतना पत्थर कैसे हो गया

गुमनामी का जीवन बिता रहे आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले प्रख्यात गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को पटना मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में निधन हो गया। लेकिन शर्मिंदगी की बात यह है कि निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर काफी देर तक एंबुलेंस का इंतजार करता रहा। कुमार विश्वास के अनुसार, उफ्फ इतनी विराट प्रतिभा की ऐसी उपेक्षा विश्व में इसकी मेधा का लोहा माना जाता है। उसके प्रति उसी का बिहार इतना पत्थर हो गया?

कुमार विश्वास ने अपने ट्वीट में बिहार के सीएम नीतीश कुमार, बीजेपी नेता गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे और नित्यानंद को टेग करते हुए लिखा, आप सब से सवाल है बनता– भारत मां क्यों सौंपें ऐसे मेधावी बेटे, इस देश को जब हम उन्हें संभाल भी नहीं सके? अस्पताल प्रशासन की तरफ से एंबुलेंस नहीं मुहैया करवाने के कारण उनका पार्थिव शरीर अस्पताल परिसर में बाहर की ओर करीब डेढ़ घंटे तक स्ट्रेचर पर रखा रहा। परिजनों के साथ पटना के एक अपार्टमेंट में गुमनामी की जिंदगी बिता रहे वशिष्ठ 40 साल से ज्यादा समय से मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थे। गुरुवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद परिजन उन्हें तत्काल पीएमसीएच लेकर गए डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। उनके भाई ने बताया कि एंबुलेंस वाले ने पार्थिव शरीर भोजपुर ले जाने के लिए ₹5000 मांगे। बाद में कलेक्टर और कई नेता पहुंचे जिसके बाद पार्थिव देह को एंबुलेंस से उनके पैतृक आवास भोधपुर ले जाने की व्यवस्था हुई।

प्रोफेसर केली ने पहचानी थी प्रतिभा
बिहार के बसंतपुर गांव में 2 अप्रैल 1942 को वशिष्ठ का जन्म हुआ था। पटना साइंस कॉलेज में पढ़ते हुए उनकी मुलाकात अमेरिका के प्रोफेसर जाॅन केली से हुई। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर प्रोफेसर केली ने उन्हें अमेरिका आकर शोध करने का निमंत्रण दिया। 1965 में वह अमेरिका चले गए। 1970 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके बाद वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए। वशिष्ठ ने नासा में भी काम किया पर 1971 में भारत लौट आए। 1973 में उनकी शादी हो गई शादी के एक साल बाद उन्हें मानसिक दौरे आने लगे और धीरे-धीरे वह सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हो गये।

सिजोफ्रेनिया से थे पीड़ित
श्री सिंह करीब 40 साल से मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थे। वे लंबे समय से पटना के अपार्टमेंट में गुमनाम जिंदगी जी रहे थे। हालांकि मरने से पहले तक वे कॉपी पेंसिल अपने साथ रखते थे और कुछ ना कुछ गणित लगाते रहते थे। सिंह का लंबे समय से अस्पताल में इलाज चल रहा था, हाल में उन्हें छुट्टी दी गई थी। लेकिन दोबारा तबीयत बिगड़ने पर गुरुवार को फिर से भर्ती कराया गया था, हालांकि जब उन्हें अस्पताल ले जाएगा तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

कंप्यूटर और उनका कैलकुलेशन एक जैसा
वशिष्ठ ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी। उनके बारे में यह भी मशहूर था कि नासा में अपोलो की लांचिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए थे तो ठीक होने पर उनका और कंप्यूटरों का कैलकुलेशन एक जैसा था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि,

“यह समाज और बिहार के लिए एक बड़ा नुकसान है। नीतीश कुमार ने कहा उनका निधन बिहार के लिए अपूर्ण क्षति है और वह प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

राष्ट्रपति और पीएम ने दी श्रद्धांजलि
वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा कई अन्य नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी। विलक्षण प्रतिभा के धनी वशिष्ठ के निधन को अपूरणीय क्षति बताया।

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