झारखंड चुनाव : पिता जेल में, मां तड़ीपार और बेटी ने सबसे कम उम्र विधायक बन रचा इतिहास

हजारीबाग जिले के बड़कागांव विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अंबा प्रसाद ने महज 27 साल की कम उम्र में विधायक बनने का इतिहास रच दिया। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी आजसू पार्टी के प्रत्याशी रोशन लाल चौधरी को 30,140 वोटों से हराया है। बता दे, झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस महागठबंधन को जनादेश मिला है। हेमंत सोरेन राज्य के अगले CM बनेंगे लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है तो कम उम्र की विधायक की।

अंबा देवी को राजनीति अपनी विरासत में मिली है। उनके पिता योगेंद्र साव और मां निर्मला देवी इसी क्षेत्र से विधायक रहे हैं। अंबा की मां निर्मला देवी 2014 में कांग्रेस से विधायक चुनी गई थी। इसके बाद NTPC प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के कारण उनके पिता अभी तक जेल में और मां राज्य से बाहर है। इसी बीच अंबा का भाई भी जेल में डाल दिया गया जिसके लिए वह कोर्ट कचहरी के चक्कर काटती रही। उन्होंने अपने भाई को जेल से निकाला और फिर राजनीति में उतरने की ठानी। अंबा की शुरुआती पढ़ाई गांव से ही हुई है। उन्होंने बीबीए ग्रेजुएशन किया है। झारखंड के टॉप कॉलेजों में से एक XISS से पढ़ी अंबा ने ह्यूमन रिसोर्स का कोर्स किया है। वह IAS बनना चाहती थी। जिसके लिए उन्होंने कोचिंग की। साल 2014 में IAS की तैयारी करने के लिए अंबा दिल्ली चली गई। अंबा ने कुछ महीने कोचिंग की लेकिन पिता पर लगे गंभीर आरोपों के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। यहीं से उनका राजनीतिक कैरियर शुरू हो गया।

अंबा राजनीति में आने के बाद बड़का गांव विधानसभा क्षेत्र में अपने माता पिता के नक्शे कदम पर विकास और शिक्षा क्षेत्र में बदलाव और विस्तार की बात करती है। वह अपनी प्रतिद्वंदी पार्टी BJP के खिलाफ जमकर चुनावी रैलीयों में बोलती है। अंबा अपने कैंपेन और चुनावी मुद्दों के कारण सुर्खियों में है। वह क्षेत्र की समस्याएं जनता के बीच जाकर सुनती हैं। 4 साल से लगातार क्षेत्र में काम कर रही है और मां निर्मला देवी के प्रचार-प्रसार में जुटी रहीं है। जब अंबा का नाम सामने आया कि विधानसभा चुनाव 2019 के लिए उन्हें खड़ा किया जा रहा है तो वह सारी रात दुविधा में रही और सोचती रही। अंबा चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जिले के विकास को लेकर होने वाली बैठक में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसलिए राहुल गांधी खुद अंबा के लिए रैली करने आए थे।

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