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आंध्र प्रदेश ने पास किया "दिशा बिल", 21 दिनों के अंदर दी जाएगी बलात्कारियों को सजा

27 नवंबर को हैदराबाद के बाहरी इलाके शाद नगर में एक युवती का अधजला शव बरामद हुआ था। उस शव की पहचान प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के तौर पर हुई थी। प्रीति रेड्डी की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई और फिर लाश को जला दिया गया था। इस मामले में मोहम्मद पाशा, नवीन, चिंताकुंता केशावुलु और शिवा को गिरफ्तार किया गया था। आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लोग इन्हें जल्द से जल्द सजा दिलाने की मांग कर रहे थे। घटना के 9 दिन के अंदर ही खबर आई थी कि हैदराबाद पुलिस ने इनका एनकाउंटर कर दिया। आरोपियों को पुलिस घटना स्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट करने ले गई थी। वहां पुलिस का हथियार छीन आरोपितों ने भागने की कोशिश की और पुलिस कार्यवाही में मारे गए।

आंध्र प्रदेश विधानसभा ने 13 दिसंबर को आंध्र प्रदेश विधेयक 2019 (आंध्र प्रदेश आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2019 पारित कर दिया। इसमें महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों का निपटारा 21 दिन के भीतर करने का नियम है और इसमें दोषी को फांसी की सजा भी दी जाएगी। इस प्रस्तावित नए कानून का नाम “आंध्र प्रदेश दिशा अधिनियम आपराधिक कानून अधिनियम 2019 रखा गया है”।हाल ही पड़ोसी राज्य तेलंगाना में एक पशु चिकित्सक प्रियंका रेड्डी के साथ गैंगरेप और फिर उसकी नृशंस हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। यह प्रस्तावित विधेयक पीड़िता को श्रद्धांजलि स्वरुप समर्पित है। इस विधेयक को गृह राज्यमंत्री एवं सुचरिता ने विधानसभा में पेश किया जिसे सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस ने “क्रांतिकारी” बताया।

“दिशा बिल” को आंध्र प्रदेश क्रिमिनल लॉ (संशोधन) एक्ट 2019 भी कहा गया है। इस विधेयक के तहत रेप और गैंगरेप के अपराध के लिए ट्रायल को तेज किए जाने के तहत 21 दिन के अंदर फैसला देने और मौत की सजा का प्रावधान है। इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व में कैबिनेट ने “दिशा बिल” को पास किया था। मौजूदा कानून ऐसे मामलों में मुकदमा चलाने के लिए 4 महीने का समय देता है। इस बिल में रेप के मामलों में FIR दर्ज होने के 21 दिन के अंदर ट्रायल पूरा होने के साथ-साथ सजा का प्रावधान है। बिल में IPC की धारा 354 में संशोधन करके नई धारा 354(E) की गई है। संशोधित कानून, ऐसे मामलों में जहां संज्ञान लेने लायक साक्ष्य उपलब्ध हो, जांच को 7 दिन में पूरी करने और अगले 14 दिनों में मुकदमा चलाने का प्रावधान करता है ताकि 21 दिनों के भीतर सजा दी जा सके।

खबर के अनुसार, भारतीय दंड संहिता में 3 नए खंड 354E, 354F, 354G जोड़े जाएंगे। जो महिलाओं के उत्पीड़न, बच्चों पर यौन उत्पीड़न और क्रमशः बच्चों पर बढ़ रहे यौन हमले को परिभाषित करते हैं। आईपीसी धारा 376 (बलात्कार) 376D (अस्पताल के किसी भी महिला के प्रबंधन या स्टाफ के किसी सदस्य द्वारा संभोग) और 376DA (16 साल से कम उम्र की महिला से सामूहिक बलात्कार) को सूचीबद्ध अपराधों के लिए मृत्युदंड में शामिल किया जाएगा।

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