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सिर्फ दिखावे तक सीमित रहेगी यूपी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की एंट्री?

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव  (UP Assembly Electiom 2022) के लिए दलों के भीतर और बाहर, तैयारियां शुरु हो गई हैं. एक ओर जहां कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन हासिल करने की कोशिश में है तो वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोबारा सत्ता में आने की कोशिश में हैं. इसके साथ ही मौजूदा सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी सरकार को आगे भी बरकरार रखने की कोशिश में है. इन सबके बीच दिल्ली में सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) भी आगामी विधानसभा चुनाव में दमखम के साथ उतरने की कोशिश मे है. इस साल फरवरी में AAP ने दिल्ली विधानसभा में सत्ता बरकरार रखी. लगातार तीसरी बार पार्टी ना सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बल्कि दो बार सरकार भी बनाई. इसके बाद ही आप ने राष्ट्रीय आकांक्षा के साथ लोगों के सामने आई. हालांकि दिल्ली में हुए दंगो और फिर कोरोना वायरस के चलते पार्टी की प्लानिंग आगे नहीं बढ़ पाई.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि ‘ हमारी योजना  यूपी, उत्तराखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में व्यापक प्रचार अभियान शुरू करने की थी. लेकिन कोविड -19 संकट  के चलते ऐसा नहीं हो पाया. चूंकि अब बंगाल और बिहार के लिए मुश्किल से ही समय बचा है, इसलिए पार्टी ने यूपी और उत्तराखंड पर ज्यादा से ज्यादा फोकस करने का फैसला किया है, जहां अभी भी विधानसभा चुनावों में समय है.’

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राज्य में जरूरी जगह हासिल करना महत्वपूर्णहालांकि यह कहना आसान है लेकिन 403 विधानसभा सीटों और 80 लोक सभा सीटों के साथ राज्य में कोई महत्वपूर्ण जगह पाना आसान नहीं है और AAP को इसकी पूरी जानकारी है. जनता का अपनी ओर ध्यान खींचना जरूरी है.

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सुल्तानपुर  निवासी सांसद संजय सिंह को राज्य में AAP की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यूपी की राजनीति के प्रति उनकी श्रद्धा, योगी सरकार के प्रति कानून व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाने का जोश लोगों में उनका ध्यान खींच रहा है.

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News18 से बात करते हुए, सिंह ने कहा, ‘AAP कार्यकर्ता पुलिस कार्रवाई से डरते नहीं हैं. हम एक ऐसी पार्टी हैं जो संघर्ष से बाहर निकली है और हम जेल जाने से नहीं डरते.’ योगी सरकार को चुनौती देते हुए AAP सांसद ने आगे कहा, ‘मैं यहां लखनऊ में हूं, और भ्रष्टाचार और ‘जंगल राज’ के खिलाफ आवाज उठाता रहूंगा. अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में हिम्मत है, तो उन्हें मुझे गिरफ्तार कर लेना चाहिए.’

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क्या हैं पार्टी के संगठन का सच?
इनके पास मजबूत नेताओं और संगठन कमी है इसके साथ ही पार्टी ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव और फिर साल 2019 के आम चुनावों में कोई गंभीर कोशिश नहीं की गई. हालांकि AAP के लिए प्रदेश में सबसे बड़ी चुनौती संगठन की है. हालांकि AAP नेताओं का दावा है कि उनके पास अधिकांश जिलों में एक संगठनात्मक ढांचा है लेकिन यह बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है.

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इसके साथ अभी भी यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि राज्य में ‘आप’ की मौजूदगी का क्या असर होगा. क्या पार्टी राज्य में कोई बड़ा कारक बनेगी या फिर सिर्फ खबरों में ही रह जाएगी. यह सारे सवाल भविष्य के गर्भ में है.

प्रांशू मिश्रा की यह रिपोर्ट मूलतः अंग्रेजी में है. पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- AAP Gets Down to Business in UP, But Can it be the David Among Goliaths of the State Ahead of the 2022 Polls?


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