Categories: देश

मोरेटोरियम: बैंक से कर्ज लिया है तो सरकार दे सकती है बड़ी राहत, उठाया ये कदम

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (File Photo)

वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने गुरुवार को जानकारी दी है कि मोरेटोरियम मामले बैंक कर्जदारों को राहत देने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है. इस कमेटी को एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी.

नई दिल्ली. बैंक से कर्ज (Bank Borrowers) लेने वाले लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक एक्सपर्ट क​मेटी (Expert Committee) बनाई है. इस कमेटी के सदस्यों में पूर्व CAG चेयरमैन राजीव महर्षि, IIM-A के पूर्व प्रोफेसर और आरबीआई मौद्रिक नीति समिति के पूर्व सदस्य डॉ. रविंद्र ढोलकिया और एसबीआई व आईडीबीआई बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक बी श्रीराम शामिल होंगे.

क्या होगा इस कमेटी का काम?
यह एक्सपर्ट कमेटी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  में सुनवाई के दौरान उठाए सवालों का आकलन करेगी ताकि ब्याज पर ब्याज देने की समस्या का समाधान निकाला जा सके. इसके अलावा भी मोरेटोरियम से जुड़ी अन्य समस्याओं पर ही यह कमेटी आकलन के बाद अपनी बात रखेगी. यह कमेटी फाइनेंशियल दबाव को कम करने के लिए भी सुझाव देगी ताकि सोसाइटी के विभिन्न वर्ग को राहत मिल सके. मौजूदा महामारी जरूरी कदम उठाने के लिए भी यह कमेटी सुझाव देगी.

भारतीय स्टेट बैंक इस कमेटी को सेक्रेटेरियल सपोर्ट देगी. इसके जरूरत पड़ने पर यह कमेटी अन्य बैंकों और शेयरहोल्डर्स की भी मदद ले सकती है. वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक कमेटी को एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी.

यह भी पढ़ें:  अतिरिक्त कर्ज के लिए दिसंबर तक रुक सकती है सरकार, इन बातों पर होगी नज़र

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
बता दें कि इसके पहले गुरुवार को ही मोरेटोरियम मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले को बार-बार टाला जा रहा है. अब इस मामले को सिर्फ एक बार टाला जा रहा है वो भी फाइनल सुनवाई के लिए. इस दौरान सब अपना जवाब दाखिल करें और मामले में ठोस योजना के साथ अदालत आएं.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा, ‘उच्चतम स्तर पर विचार हो रहा है. राहत के लिए बैंकों और अन्य हितधारकों के परामर्श कर दो या तीन दौर की बैठक हो चुकी हैं और चिंताओं की जांच की जा रही है.’ केंद्र ने दो हफ्ते का समय मांगा था इस पर कोर्ट ने पूछा था कि दो हफ्ते में क्या होने वाला है? आपको विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुछ ठोस करना होगा. वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की.

यह भी पढ़ें: वैश्विक मैन्युफैक्चरर्स को लुभाने के लिए 1.68 लाख करोड़ रुपये के पैकेज पर काम कर रही सरकार

अगली सुनवाई तक मानने होंगे ये निर्देश
>> शीर्ष अदालत के बैंक लोन अकाउंट को अगले दो महीने तक एनपीए घोषित नहीं किए जाने के आदेश से कर्जधारकों (Borrowers) को बड़ी राहत मिली है. दरअसल, अगर किसी व्‍यक्ति के लोन को एनपीए घोषित कर दिया जाता है तो उसकी सिबिल रेटिंग (CIBIL Rating) खराब हो जाती है. इससे उसे भविष्‍य में किसी बैंक से लोन लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

>> वहीं, अगर लोन मिल जाता है तो उसे अच्‍छी सिबिल रेटिंग वाले व्‍यक्ति के मुकाबले ज्‍यादा ब्‍याज दर (Interest Rate) चुकाना पड़ सकता है, क्‍योंकि अब बैंक इसी आधार पर ब्याज दरें भी तय कर रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्रेडिट कार्ड, होम लोन, व्हीकल लोन, होम लोन की किस्‍त मोरेटोरियम खत्‍म होने के दो महीने बाद तक नहीं चुकाने पर भी बैंक उसे NPA घोषित नहीं करेंगे. हालांकि, डिफॉल्ट पर जुर्माना या ब्याज वसूल सकते हैं.


hindi.news18.com

Leave a Comment