Categories: देश

मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला चौंकाने वाला लेकिन अंतिम नहीं : अशोक चव्हाण

मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) के मंत्री अशोक चव्हाण (Ashok Chavan) ने बुधवार को कहा कि मराठा समुदाय (Maratha Community) को आरक्षण देने के 2018 के राज्य कानून के अमल पर रोक लगाने का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का आदेश “अप्रत्याशित और चौंकाने वाला” है. कांग्रेस नेता ने हालांकि कहा कि तीन न्यायाधीशों की न्यायालय की पीठ ने एक बृहद संविधान पीठ को भेज दिया है और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि इसलिए यह दावा करना सही नहीं है कि आरक्षण पर रोक लगा दी गई है.

चव्हाण ने कहा कि राज्य सरकार सोमवार को प्रधान न्यायाधीश से संपर्क करेगी और रोक हटाने का अनुरोध करेगी. चव्हाण राज्य में लोक निर्माण मंत्री हैं और वह मराठा आरक्षण संबंधी एक कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख भी हैं. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘मामले को बृहद संविधान पीठ को सौंपते हुए न्यायालय ने जो अंतरिम आदेश दिया है वह अप्रत्याशित, चौंकाने वाला और आश्चर्यजनक है.’’

ये भी पढ़ें- महागठबंधन में सीट शेयरिंग के मसले पर उभरा कांग्रेस के बड़े नेता का दर्द, RJD ने ली चुटकी

सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर सुनाया ये फैसलाबता दें उच्चतम न्यायालय ने शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय के लिये आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी महाराष्ट्र सरकार के 2018 के कानून के अमल पर बुधवार को रोक लगा दी लेकिन स्पष्ट किया कि जिन लोगों को इसका लाभ मिल गया है उनकी स्थिति में कोई बदलाव नही होगा. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट्ट की पीठ ने इस मामले को वृहद पीठ का सौंप दिया जिसका गठन प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे करेंगे.

इन याचिकाओं में शिक्षा (Education) और रोजगार (Employement) में मराठा समुदाय के लिये आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी कानून की वैधता को चुनौती दी गयी है. शीर्ष अदालत ने कहा कि 2018 के कानून का जो लोग लाभ उठा चुके हैं उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा.

ये भी पढ़ें- चीनी आक्रामकता के बीच भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया की पहली संयुक्त बातचीत

2018 में महाराष्ट्र सरकार ने बनाया था कानून
महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिये शिक्षा और रोजगार में आरक्षण कानून, 2018 में बनाया था.

बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल जून में इस कानून को वैध ठहराते हुये कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है और इसकी जगह रोजगार में 12 और प्रवेश के मामलों में 13 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं होना चाहिए.

भाजपा ने महाराष्ट्र सरकार पर बोला हमला
वहीं भाजपा ने इस मुद्दे पर राज्य की महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार पर हमला बोला और कहा कि यह मराठाओं के लिए एक ‘‘काला दिन’’ है.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया कि शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस वाली महा विकास आघाड़ी सरकार यह सुनिश्चित करने को लेकर ‘‘गंभीर नहीं थी’’ उच्चतम न्यायालय के समक्ष आरक्षण का आधार बना रहे.

उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राकांपा अध्यक्ष शरद पवार पर मामले पर ध्यान नहीं देने का आरोप भी लगाया.


hindi.news18.com

Leave a Comment