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क्या Black Hole में जाने पर दूसरे ग्रह का रास्ता खुल जाता है?

ब्लैक होल को लेकर कितनी ही फिल्में बन चुकी हैं. ये अंतरिक्ष की वो जगह है जहां फिजिक्स का कोई कायदा-कानून नहीं चलता है. इसका गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि इसके भीतर जाने के बाद कोई भी चीज बाहर नहीं आ पाती है, यहां तक कि प्रकाश भी. ब्लैक होल पर जो भी रौशनी पड़ती है, तुरंत भीतर गायब हो जाती है. कुछ समय पहले वैज्ञानिकों ने पाया कि ये रहस्यमयी खगोलीय चीज लगातार बढ़ रही है और इसके बावजूद इसका आकार जस का तस है. बढ़ने के बाद भी आकार के न बढ़ने का जवाब अब जाकर मिल पाया है. जानिए, आखिर क्या है ब्लैक होल और कैसे बढ़ने के बाद भी वो सिमटा हुआ है.

ब्लैक होल किसी तारे का आखिरी वक्त माना जा सकता है. जब कोई विशाल तारा खत्म होने की ओर होता है तो अपने ही भीतर सिकुड़ने लगता है. आखिर में ये ब्लैक होल बन जाता है जो अपने भीतर किसी भी बड़ी से बड़ी चीज को निगल सकता है.

मरते हुए तारे का आकर्षण इतना बढ़ा जाता है कि उसके भीतर का सारा पदार्थ आपस में ही सिमट जाता है और एक छोटे काले बॉल की आकृति ले लेता है. अब इसका कोई आयतन नहीं रह जाता है लेकिन घनत्व अनंत रहता है. इसके बाद ये स्पेस के सारे पिंडों को अपनी ओर खींचने लगता है. जितनी ज्यादा चीजें इसके भीतर समाती जाती है, इसकी ताकत उतनी ही बढ़ती जाती है.

अंतरिक्ष विज्ञानी ब्लैक होल को उनके आकार के आधार पर अलग करते हैं (Photo-pixabay)

अंतरिक्ष विज्ञानी ब्लैक होल को उनके आकार के आधार पर अलग करते हैं. छोटे ब्लैक होल स्टेलर ब्लैक होल कहे जाते हैं जबकि बड़े वालों को सुपरमैसिव ब्लैक होल कहा जाता है. इनका भार इतना ज्यादा होता है कि एक ब्लैक होल लाखों-करोड़ों सूरज के बराबर हो सकता है. साल 1972 में सबसे पहले ब्लैक होल की पुष्टि हुई थी.

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स्टीफन हॉकिंग ने ब्लैक होल पर इवेंट होराइजन का तथ्य दिया था. इसके बाहरी हिस्से को इवेंट होराइजन कहते हैं. इससे रेडिएशन निकलती रहती है जिसे हॉकिंग रेडिएशन का नाम दिया गया. इसी की वजह से एक दिन ऐसा भी आता है जब ब्लैक होल अपना द्रव्यमान खो देता है. इस ब्लैक होल में जाकर प्रकाश, समय, स्पेस सब अपना अर्थ खो देते हैं. यहां जाने के बाद क्या होगा, ये अब तक कोई नहीं जान सका है. हो सकता है कि इससे आप किसी नए ग्रह में पहुंच जाएं या जलकर खाक हो जाएं. ये भी हो सकता है कि होल के भीतर आप रहें और अनंत काल तक वैसे ही रह जाएं.

लगातार बढ़ने के बाद भी ब्लैक होल का आकार वही रहता है

स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लियोनार्ड ससकाइंड ने इसपर काफी शोध किया कि आखिर बढ़ने के बाद ये पूरे स्पेस को निगल क्यों नहीं रहे. उन्होंने टॉय मॉडल्स को ब्लैक होल की शक्ल देकर होलोग्राम तैयार किया और सालों शोध की. इसमें पाया गया कि ब्लैक होल का आयतन और उसका संकरापन साथ ही साथ बढ़ता है. ये प्रक्रिया कितनी तेज है, इसका कोई अंदाजा फिलहाल भौतिक विज्ञान के नियम नहीं लगा सके हैं. दोनों ही चीजों के साथ बढ़ने की वजह से दोनों ही एक-दूसरे को काटते भी रहते हैं. यही वजह है कि लगातार बढ़ने के बाद भी ब्लैक होल का आकार वही रहता है, भले ही उसकी शक्ति बढ़ती जाती है.

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कैलीफोर्निया इंस्टीट्यूट के भौतिक विज्ञानी जॉन प्रिस्किल भी प्रोफेसर लियोनार्ड की थ्योरी को दिलचस्प मानते हैं. वे कहते हैं कि कॉम्प्लेक्सिटी का ये आइडिया अच्छा है और इसपर आगे शोध किया जा सकता है. हालांकि इस थ्योरी पर फिलहाल कोई भी सहमत नहीं है.

ब्लैक होल के विशेषज्ञ माने जाने वाले डगलस स्टेनफोर्ड जो कि प्रिंसटन में इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस स्टडी के शोधकर्ता भी हैं, कहते हैं कि क्या ब्लैक होल के पास कोई इंटरनल घड़ी है जो समय के साथ चलती है. ब्लैक होल को फिलहाल फिजिक्स के ज्ञात तथ्यों की मदद से नहीं समझा जा सकता, इसके लिए कल्पना को आगे ले जाना होगा.


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