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किसानों की रैली पर खट्टर सरकार ने लगाई धारा 144, एक साथ खड़े हुए किसान-व्यापारी Chandigarh-City News in Hindi

कृषि अध्यादेशों के खिलाफ रैली को लेकर सरकार और किसान आमने-सामने

किसानों को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरी ताकत झोंकी, नहीं होने देना चाहती कृषि अध्यादेशों के खिलाफ रैली

चंडीगढ़. लॉकडाउन के दौरान मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि अध्यादेशों (Agriculture Ordinances) के खिलाफ किसानों ने कुरुक्षेत्र के पिपली अनाज मंडी में रैली बुलाई है. लेकिन हरियाणा सरकार इसे रोकने में जुट गई है. बहाना कोरोना (Corona) संक्रमण बढ़ने का खोजा गया है. रैली की अनुमति नहीं मिली है. धारा 144 लगा दी गई है. पुलिस प्रशासन ने मंडी का गेट बंद कर दिया है. रैली स्थल पर पहुंचने से रोकने के लिए जिले भर में 54 नाके लगाकर 600 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. हालांकि, भारतीय किसान यूनियन के साथ व्यापारी भी खड़े हो गए हैं. ऐसे में हरियाणा सरकार के हाथ-पांव फूले हुए हैं.

हरियाणा में बीजेपी (BJP) की सरकार है. वो अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार के खिलाफ अपने राज्य में किसी भी सूरत में रैली नहीं होने देना चाहती. वो भी उस अध्यादेश के खिलाफ जिसे सरकार कृषि सुधार की दिशा में सबसे बड़ा कदम बता रही है. अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने कहा है कि सरकार ने किसानों और व्यापारियों की आवाज दबाने के लिए धारा-144 लगा दी है. इसकी वो निंदा करते हैं.

कृषि सुधार के लिए मोदी सरकार ले आई है अध्यादेश

कृषि मंत्री जय प्रकाश दलाल ने किसानों से अपील की है कि कोरोना संकट के इस समय होने वाली रैली को स्थगित करें. सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होगी. जवाब में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि सरकार को किसानों की इतनी चिंता है तो वो कोरोना काल में कृषि अध्यादेश क्यों लाई.अध्यादेश किसानों के खिलाफ: चढ़ूनी

दरअसल, गांवों में अन्नदाता जागरूकता अभियान के तहत किसानों को लामबंद किया जा रहा है. इसी कड़ी में रैली का आह्वान किया गया है. भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशा अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसानों को उद्यमी बनाने के नाम पर बहकाया जा रहा है. जो कृषि अध्यादेश लाए गए हैं वे किसान हित में नहीं हैं. चढ़ूनी ने बताया कि प्रशासन ने उनके घर पर नोटिस चस्पा कर दिया है कि रैली के आयोजन पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

उनका कहना है कि इन अध्यादेश के हिसाब से कंपनियां एडवांस में ही किसान की फसल खेतों में ही खरीद लेंगी. मंडियों में फसल बिकने पर मार्केट फीस लगेगी जबकि उसके बाहर कोई फीस नहीं होगी. अध्यादेशों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मिलने की बात ही नहीं की गई है, ऐसे में किसानों को उचित दाम नहीं मिलेगा और मंडियां बंद हो जाएंगी.

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सभी फसलों की खरीद एमएसपी पर होगी: कृषि मंत्री

उधर, कृषि मंत्री जेपी दलाल ने आज यहां स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार राज्य के सभी किसानों की सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करवाने तथा प्रदेश में सरकारी मंडियों का और विस्तार करने के लिए कटिबद्ध है. भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम चढ़ुनी की उच्च अधिकारियों के साथ कल देर रात तक हुई बैठक में यह बात भी स्पष्ट कर दी गई थी कि सरकार इस बारे में वैधानिक व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने को भी तैयार है. इसलिए उन्हें उम्मीद है कि प्रस्तावित किसान रैली को वापस ले लिया जाएगा.


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