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एचएसटीडीवी का सफल प्रायोगिक परीक्षण स्वदेशी रक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक: शाह

Hypersonic Test Demonstration Vehicle: भारत ने स्वदेश में विकसित ‘हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी निदर्शक यान’ (एचएसटीडीवी) का सोमवार को सफल प्रायोगिक उड़ान परीक्षण किया.

Hypersonic Test Demonstration Vehicle: भारत ने स्वदेश में विकसित ‘हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी निदर्शक यान’ (एचएसटीडीवी) का सोमवार को सफल प्रायोगिक उड़ान परीक्षण किया.

नई दिल्ली. ‘हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी निदर्शक यान’ (HSTDV) के सफल प्रायोगिक उड़ान परीक्षण को स्वदेशी रक्षा क्षेत्र के लिए ‘ऐतिहासिक’ करार देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने सोमवार को कहा कि यह उपलब्धि देश की रक्षा क्षमताओं को और सशक्त करेगी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) की दृष्टि को हासिल करने में मदद करेगी.

शाह ने इस उपलब्धि के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को बधाई देते हुए ट्वीट कर कहा, ‘‘भारत के स्वदेशी रक्षा क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि भारत ने हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी निदर्शक यान की सफल प्रायोगिक परीक्षण उड़ान भरी है. यह हमारी रक्षा क्षमताओं को और सशक्त करेगा तथा यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि को हासिल करने में मदद करेगा. डीआरडीओ को बहुत-बहुत बधाई.’’

ये भी पढ़ें- चीन की तर्ज पर बलोच लड़ाकों के लिए ‘डी-रैडिक्लाइज़ेशन’ कैंप चला रहा पाकवहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने एचएसटीडीवी की सफल प्रायोगिक उड़ान पर डीआरडीओ को बधाई दी और इसे एक ‘‘महत्वपूर्ण उपलब्धि’’ करार दिया. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘आत्मनिर्भर भारत की प्रधानमंत्री की परिकल्पना की दिशा में इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मैं डीआरडीओ को बधाई देता हूं. मैंने परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों से बात की और उन्हें इस महान उपलब्धि पर बधाई दी.’’

भारत ने आज एचएसटीडीवी सफल प्रायोगिक उड़ान परीक्षण किया. इसके साथ ही भारत उन देशों के चुनिंदा समूह में शामिल हो गया है जिनके पास अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की क्षमता है. ऐसे ये तकनीक करेगी भारत की मदद
हाइपरसोनिक प्रणोदन प्रौद्योगिकी पर आधारित एचएसटीडीवी को डीआरडीओ ने विकसित किया है जो लंबी दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइलों और हवाई रक्षा प्रणाली जैसे भविष्य के उपकरण विकसित करने में भारत की मदद करेगा.

अधिकारियों के मुताबिक एचएसटीडीवी मिसाइलों को लगभग 6 मैक या ध्वनि की गति से छह गुना अधिक रफ्तार प्रदान करने में सक्षम है. अमेरिका, रूस और चीन जैसे कुछ देशों के पास ही यह प्रौद्योगिकी है.


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